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साईं अपने भ्रात को

कुंडलियाँ · लगभग २ मिनट
साईं अपने भ्रात को कबहुँ न दीजै त्रास।पलक दूर नहिं कीजिये सदा राखिये पास॥सदा राखिये पास त्रास कबहूं नहिं दीजै।त्रास दियो लंकेश ताहिकी गाति सुनि लीजै॥कह गिरिधर कबिराय रामसों मिलियो जाई।पाप बिभीषण राज्य लंकपति बाज्यो सांई॥

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