साईं समय न चूकिये, यथाशक्ति सन्मान।को जानै को आइहै, तेरी पौंरि प्रमान॥तेरी पौंरि प्रमान, समय असमय तकि आवै।ताको तू मन खोलि, अंकभरि हृदय लगावै॥कह गिरिधर कबिराय सबै यामें सुधि आई।शीतल जल फल-फूल समय जनि चूकौ सांई॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+