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हुक्का बाँधो फेंट में

कुंडलियाँ · लगभग २ मिनट
हुक्का बाँधो फेंट में, नैग हि लीन्हीं हाथ।चले राह में जात हैं, लिये तमाखू साथ॥लिये तमाखू साथ, गैल को धंधा भूल्यौ।गह सब चिंता भूलि, आगि देखत मन फूल्यौ।कह गिरिधर कविराय, यों यम कर आयो रुक्का।जितै गयौ सो काल, हाथ में रहियो हुक्का॥

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