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दौलत पाइ न कीजिये

कुंडलियाँ · लगभग २ मिनट
दौलत पाइ न कीजिये, सपने में अभिमान।चंचल जल दिन चारिको, ठाउँ न रहत निदान॥ठाउँ न रहत निदान, जियत जग में यश लीजै।मीठे बचन सुनाय, बिनय सबही की कीजै॥कह गिरिधर कबिराय अरे यह सब घट तौलत।पाहुन निशिदिन चारि रहत सबही के दौलत॥

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