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क्यों हम जीवैं दास गुसाईं

पद · लगभग २ मिनट
क्यों हम जीवैं दास गुसाईं। जे तुम छाडौ समरथ साईं॥जे तुम जन को मनहिं बिसारा। तौ दूसर कौण सँभालनहारा।जे तुम परिहरि रहौ निनारे। तौ सेवग जाइ कौन के द्वारे॥जे जन सेवग बहुत बिगारै। तौ साहिब गरवा दोष निवारै॥समरथ साईं साहिब मेरा। दादू दास दीन है तेरा॥

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