क्यों हम जीवैं दास गुसाईं। जे तुम छाडौ समरथ साईं॥जे तुम जन को मनहिं बिसारा। तौ दूसर कौण सँभालनहारा।जे तुम परिहरि रहौ निनारे। तौ सेवग जाइ कौन के द्वारे॥जे जन सेवग बहुत बिगारै। तौ साहिब गरवा दोष निवारै॥समरथ साईं साहिब मेरा। दादू दास दीन है तेरा॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
जैसा है तैसा नाउँ तुम्हारा, ज्यौं है त्यौं कहि साईँदादू दयालकविताजैसा है तैसा नाउँ तुम्हारा, ज्यौं है त्यौं कहि साईँदादू दयाल२ मिनट का पाठ
रँग भरि खेलौं पिउ सौं, तहँ बाजै बेन रसालदादू दयालकवितारँग भरि खेलौं पिउ सौं, तहँ बाजै बेन रसालदादू दयाल२ मिनट का पाठ
पासै बैठा सब सुनै, हम कौं ज्वाब न देइदादू दयालकवितापासै बैठा सब सुनै, हम कौं ज्वाब न देइदादू दयाल२ मिनट का पाठ