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कलि कानन अघ ओघ अति, विकट कुमृगन्ह समानु

दोहा · लगभग २ मिनट
कलि कानन अघ ओघ अति, विकट कुमृगन्ह समानु।हरि जस अनल लहै इतै, ग्यान बिराग कृपानु॥

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