राम भजन तैं काम सब, उभय लोक आनंदझामदासकविताराम भजन तैं काम सब, उभय लोक आनंद
२ मिनट का पाठ
लेखक के साथ
कहानियाँ, कविताएँ और विचार—अपने मन के साथ पढ़िए।
६ रचनाएँ

राम भजन तैं काम सब, उभय लोक आनंदझामदासकविता
अधम उधारन राम के, गुन गावत श्रुति साधुझामदासकविता
एहि कलि पारावार महँ, परौ न पावत पारझामदासकविता
कलि कानन अघ ओघ अति, विकट कुमृगन्ह समानुझामदासकविता
‘झाम’ राम सुमिरन बिना, देह न आवै कामझामदासकविता
कलि मल हरन सरीर अति, नहिं लखि अपर उपाइझामदासकविता