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कलि मल हरन सरीर अति, नहिं लखि अपर उपाइ

दोहा · लगभग २ मिनट
कलि मल हरन सरीर अति, नहिं लखि अपर उपाइ।एह रघुपति गुन सिंधु मरु, मजत उज्जलताइ॥

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