कलि कानन अघ ओघ अति, विकट कुमृगन्ह समानुझामदासकविताकलि कानन अघ ओघ अति, विकट कुमृगन्ह समानुझामदास२ मिनट का पाठ
‘झाम’ राम सुमिरन बिना, देह न आवै कामझामदासकविता‘झाम’ राम सुमिरन बिना, देह न आवै कामझामदास२ मिनट का पाठ