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मधुकर ब्याकुल फिरत चहुँ, थिरत न कोउ कलीन

दोहा · लगभग २ मिनट
मधुकर ब्याकुल फिरत चहुँ, थिरत न कोउ कलीन।कह जमाल मालति बिरह, किंसुक की रस लीन॥

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