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सुंदर देह मलीन अति, नखशिख भरे बिकार

दोहा · लगभग २ मिनट
सुंदर देह मलीन अति, नखशिख भरे बिकार।रक्त पीप मल मूत्र पुनि, सदा बहै नव द्वार॥

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