सुंदर मन मृग रसिक है, नाद सुनै जब कांनसुंदरदासकवितासुंदर मन मृग रसिक है, नाद सुनै जब कांन
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सुंदर मन मृग रसिक है, नाद सुनै जब कांनसुंदरदासकविता
मन ही बडौ कपूत है, मन ही महा सपूतसुंदरदासकविता
सुंदर बिरहनि अति दुखी, पीव मिलन की चाहसुंदरदासकविता
बहुत छिपावै आप कौं, मुझे न जांगै कोइसुंदरदासकविता
सुंदर दुर्जन सारिषा, दुखदाई नहिं औरसुंदरदासकविता
सुमिरन तें श्रीपति मिलै, सुमिरन तें सुखसारसुंदरदासकविता
जो कोउ मारै बान भरि, सुंदर कछु दुख नांहिंसुंदरदासकविता
देह आप करि मांनिया, महा अज्ञ मतिमंदसुंदरदासकविता
सद्गुरु भ्राता नृपति कै, बेड़ी काटै आइसुंदरदासकविता
दिस-दिस तें बादल उठे, बोलत चातक मोरसुंदरदासकविता
राम नाम शंकर कह्यौ, गौरी कौं उपदेससुंदरदासकविता
माता पिता लगावते, छाती सौं सब अंगसुंदरदासकविता
यौं मति जानै बावरे, काल लगावै बेरसुंदरदासकविता
सुन्दर भइया कहत हौ, मेरी दूजी बांहसुंदरदासकविता
चंच संवारी जिनि प्रभू, चूंन देइगो आंनिसुंदरदासकविता
कल न परत पल एक हूँ, छाडे साँस उसाँससुंदरदासकविता
छपन कोटि आज्ञा करैं, मेघ पृथी पर आइसुंदरदासकविता
सुन्दर मैली देह यह, निर्मल करी न जाइसुंदरदासकविता
सुन्दर गर्व कहा करै, देह महा दुर्गंधसुंदरदासकविता
सुन्दर तूं तौ एकरस, तोहि कहौं समुझाइसुंदरदासकविता
सुन्दर माया मोह तजि, भजिये आतम रामसुंदरदासकविता
मेरै मंदिर माल धन, मेरौ सकल कुटुंबसुंदरदासकविता
सुंदर सद्गुरु शब्द का, ब्यौरि बताया भेदसुंदरदासकविता
सुन्दर पक्षी वृक्ष पर, लियौ बसेरा आनिसुंदरदासकविता
संत मुक्त के पौरिया, तिनसौं करिये प्यारसुंदरदासकविता
दया करहु अब रामजी, आवौ मेरै भौंनसुंदरदासकविता
सुंदर ग़ाफ़िल क्यौं फिरै, साबधान किन होयसुंदरदासकविता
सुन्दर अविनाशी सदा, निराकार निहसंगसुंदरदासकविता
सुन्दर ताला शब्द का, सद्गुरु खोल्या आइसुंदरदासकविता
सुन्दर अति अज्ञान नर, समुंझत नहीं लगारसुंदरदासकविता
मेरी मेरी करत है, तोकौं सुद्धि न सारसुंदरदासकविता
चमक-दमक सब मिटि गई, जीव गयौ जब आपसुंदरदासकविता
मारग जोवै बिरहनी, चितवै पिय की वोरसुंदरदासकविता
सुंदर भजि भगवंत कौं, उधरे संत अनेकसुंदरदासकविता
पाथर से भारी भई, कौन चलावै जाहिसुंदरदासकविता
सुन्दर लोग कुटंब सब, रहते सदा हजूरिसुंदरदासकविता