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हाशिया
कविता
संत मुक्त के पौरिया, तिनसौं करिये प्यार
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
संत मुक्त के पौरिया, तिनसौं करिये प्यार।
कूंची उनकै हाथ है, सुन्दर खोलहिं द्वार॥
॥
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सुन्दर पक्षी वृक्ष पर, लियौ बसेरा आनि
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दया करहु अब रामजी, आवौ मेरै भौंन
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