सुंदर मन मृग रसिक है, नाद सुनै जब कांन।हलै चलै नहिं ठौर तें, रहौ कि निकसौ प्रांन॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
बैरी घर मांहि तेरे जानत सनेही मेरेसुंदरदासकविताबैरी घर मांहि तेरे जानत सनेही मेरेसुंदरदास२ मिनट का पाठ