मिलि करि या जड़ देह सौ, रह्यौ तिसौही होइ।सुन्दर भूलौ आपु कौं, सुधि बुधि रही न कोइ॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
बोलिये तौ तब जब बोलिवे की सुधि होइसुंदरदासकविताबोलिये तौ तब जब बोलिवे की सुधि होइसुंदरदास२ मिनट का पाठ