संतनि की सेवा किये, श्रीपति होहि प्रसन्न।सुन्दर भिन्न न जानिये, हरि अरु हरि के जन्न॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
झूठौ धन झूठौ धाम झूठौ कुल झूठौ कामसुंदरदासकविताझूठौ धन झूठौ धाम झूठौ कुल झूठौ कामसुंदरदास२ मिनट का पाठ