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खैर खून खाँसी खुसी, बैर प्रीति मद पान

दोहा · लगभग २ मिनट
खैर खून खाँसी खुसी, बैर प्रीति मद पान।रहिमन दाबे ना दबैं, जानत सकल जहान॥४१॥

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