मुख्य पाठ पर जाएँ
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
मेरी सूची
पढ़ना शुरू करें
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
खोजें और पढ़ें
कहानियाँ
कविताएँ
उपन्यास
निबंध
रस से पढ़ें
लेखक
संग्रह
हाशिया
कविता
खैर खून खाँसी खुसी, बैर प्रीति मद पान
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
खैर खून खाँसी खुसी, बैर प्रीति मद पान।
रहिमन दाबे ना दबैं, जानत सकल जहान॥४१॥
॥
साझा करें
सहेजें
अ−
अ+
पिछला
खैंचि चढ़नि ढीली ढरनि, कहहु कौन यह प्रीति
अगला
गगन चढ़ै फिर क्यों तिरै, रहिमन बहरी बाज
अब कुछ और पढ़ें
सेत कुसुम के हरवा, भूषन सेत
रहीम
कविता
सेत कुसुम के हरवा, भूषन सेत
रहीम
२ मिनट का पाठ
सोवत सब गुरु लोगवा, जानेउ बाल
रहीम
कविता
सोवत सब गुरु लोगवा, जानेउ बाल
रहीम
२ मिनट का पाठ
हँसि-हँसि हेरि अरसिआ, सहज सिंगार
रहीम
कविता
हँसि-हँसि हेरि अरसिआ, सहज सिंगार
रहीम
२ मिनट का पाठ