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निज कर क्रिया रहीम कहि, सुधि भावी के हाथ

दोहा · लगभग २ मिनट
निज कर क्रिया रहीम कहि, सुधि भावी के हाथ।पाँसे अपने हाथ में, दाँव न अपने हाथ॥१०४॥

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