निज कर क्रिया रहीम कहि, सुधि भावी के हाथ।पाँसे अपने हाथ में, दाँव न अपने हाथ॥१०४॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
पलटि चली मुसकाइ, द्युति रहीम उपजाइ अतिरहीमकवितापलटि चली मुसकाइ, द्युति रहीम उपजाइ अतिरहीम२ मिनट का पाठ