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हाशिया
कविता
रहिमन ओछे नरन ते, तजौ बैर औ प्रीति
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन ओछे नरन ते, तजौ बैर औ प्रीति।
चाटे-काटे स्वान के, दूहँ भाँति बिपरीति॥२०२॥
॥
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रहिमन ओछे के किए, के तो कर बढ़ि काम
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कविता
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