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हाशिया
कविता
रहिमन तब तक ठहरिए, दान मान सनमान
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन तब तक ठहरिए, दान मान सनमान।
घटत मान जब देखिए, तुरतहि करिय पयान॥२१३॥
॥
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रहिमन जो तुम कहत हौ, संगत ही गुन होइ
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रहिमन तीर कि चोट ते, चोट परे बचि जाय
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रहीम
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रहीम
कविता
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रहीम
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सुठि सुकुमार तरुनिआ, सुनि पिअ गौन
रहीम
कविता
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रहीम
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