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कबीर गुण की बादली, तीतर बानी छाँहि

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर गुण की बादली, तीतर बानी छाँहि।बाहरि रहे ते ऊबरे, भीगे मन्दिर मांहि॥२३॥

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