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कबीर तन मन यौं जल्या, विरह अगनि सूँलागि

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर तन मन यौं जल्या, विरह अगनि सूँलागि।मृतक पीड न जांणई, जाणैगी यहु आणि॥३७॥

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