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कबीर हरि की भगति बिन, धिग जीवरण संसार

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर हरि की भगति बिन, धिग जीवरण संसार।धुँवा केरा धौलहर, जात न लागै बार॥२७॥

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