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कबीर हरि रस यौं पिया, बाकी रही न थाकि

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर हरि रस यौं पिया, बाकी रही न थाकि।पाका कलस कुँभार का, बहुरि न चढ़ई चाकि॥१॥

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