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च्य्ंता तौ हरि नांव की, और न चिंता दास

साखी · लगभग २ मिनट
च्य्ंता तौ हरि नांव की, और न चिंता दास।जे कुछ चितवैं राम विन, सोइ काल की पास ॥६॥

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