च्य्ंता तौ हरि नांव की, और न चिंता दास।जे कुछ चितवैं राम विन, सोइ काल की पास ॥६॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
स्वर्ग वास न बाछियै डारियै न नरक निवासुकबीरकवितास्वर्ग वास न बाछियै डारियै न नरक निवासुकबीर२ मिनट का पाठ