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जाका गुर भी अंधला, चेला खरा निरंध

साखी · लगभग २ मिनट
जाका गुर भी अंधला, चेला खरा निरंध।अंधै अंधा ठेलिया, दून्यूं कूप पडंत॥१५॥

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