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हाशिया
कविता
पहली बुरा कमाइ करि,बाँधी विष की पोट
कबीर
साखी · लगभग २ मिनट
पहली बुरा कमाइ करि, बाँधी विष की पोट ।
कोटि करम पेलै पलक मैं (जय) आया हरि ओट॥१६॥
॥
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अ−
अ+
पिछला
परबति परबति मैं फिर्या, नैन गँवाये रोइ
अगला
पहुँचैंगे तब कहैंगे, अमड़ैंगे उस ठाँइ
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हम मसकीन खुदाई बंदे तुम राचसु मन भावै
कबीर
कविता
हम मसकीन खुदाई बंदे तुम राचसु मन भावै
कबीर
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कबीर
कविता
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कबीर
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कबीर
कविता
सो मुल्ला जो मन स्यो लरै
कबीर
२ मिनट का पाठ