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हाशिया
कविता
राम नाम कै पटंतरै देबै कौं कुछ नाँहि
कबीर
साखी · लगभग २ मिनट
राम नाम कै पटंतरै देबै कौं कुछ नाँहि।
क्या ले गुरु संतोषिए, हौस रही मन माँहि॥४॥
॥
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राम नांम जांण्यों नहीं, लागी मोटी पोड़ि
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राम नाम जांण्यां नहीं, बात विनंठा मूल
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कबीर
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कबीर
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