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सब कोई चलन कहत है ऊँहा

पद · लगभग २ मिनट
सब कोई चलन कहत है ऊँहा। ना जानी बैकुठ है कहाँ॥आप आपका मरम न जाना। बातन ही बैकुंठ बखानाँ॥जब लग मन बैकुंठ की आस। तब लग नाही चरन निवास॥खाई कोटि न परल पगारा। ना जानौ बैकुंठ दुआरा॥कहि कबीर अब कहिये काहि। साधु संगति बैकुंठे आहि॥202॥

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