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कहाँ रह्यो, माई! नंद को मोहन

पद · लगभग २ मिनट

राग सारंग

कहाँ रह्यो, माई! नंद को मोहन।वह मूरति जिय तें नहिं बिसरति गयो सकल-जग-सोहन॥कान्ह बिना गेसुत को चारै, को ल्यावै भरि दोहन?माखन खात संग ग्वालन के, और सखा सब गोहन॥ज्यों-ज्यों सुरति करति हौं, सखि री! त्यों त्यों अधिक मनमोहन।सूरदास स्वामी के बिछुरे क्यों जीबहिं इन छोहन॥३२०॥

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