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मुलाँ कहाँ पुकारै दूरि, राँम रहीम रह्या भरपूरि

पद · लगभग २ मिनट
मुलाँ कहाँ पुकारै दूरि, राँम रहीम रह्या भरपूरि॥ टेक॥यहु तौ अलहु गूँगा नाँही, देखे खलक दुनी दिल माँही॥हरि गुँन गाइ बंग मैं दीन्हाँ, काम क्रोध दोऊ बिसमल कीन्हाँ।कहै कबीर यह मुलना झूठा, राम रहीम सबनि मैं दीठा॥60॥

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