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हाशिया
कविता
लालन मेरा लाडिला, रूप बहुत तुझ मांहिं
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
लालन मेरा लाडिला, रूप बहुत तुझ मांहिं।
सुन्दर राखे नैंन मैं, पलक उघारै नांहिं॥
॥
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सुन्दर देखै आरसी, टेढी नाखै पाग
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बांदर मैं बांदर भयौ, मच्छ मांहि पुनि मच्छ
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