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रे सुख इब मोहि बिष भरि लगा

पद · लगभग २ मिनट
रे सुख इब मोहि बिष भरि लगाइनि सुख डहके मोटे मोटे छत्रापति राजा॥ टेक॥उपजै बिनसै जाइ बिलाई संपति काहु के संगि न जाई॥धन जोबन गरब्यो संसारा, बहु तन जरि बरि ह्नै छारा।चरन कवल मन राखि ले धीरा, राम रमत सुख कहै कबीरा॥272॥

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