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ताकूँ रे कहा कीजै भाई, तजि अंमृत बिषै सूँ ल्यौ लाई

पद · लगभग २ मिनट
ताकूँ रे कहा कीजै भाई,तजि अंमृत बिषै सूँ ल्यौ लाई॥ टेक॥बिष संग्रह कहा सुख पाया,रंचक सुख कौ जनम गँवाया॥मन बरजै चित कह्यो न करई,सकति सनेह दीपक मैं परई॥कहत कबीर मोहि भगति उमाहा,कृत करणी जाति भया जुलाहा॥271॥

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