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हाशिया
कविता
पंडित सेती कहि रहे, कह्यां न मानै कोइ
कबीर
साखी · लगभग २ मिनट
पंडित सेती कहि रहे, कह्यां न मानै कोइ।
ओ अगाध एका कहै, भारी अचिरज होइ॥१॥
॥
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नैनां नीझर लाइया,रहट बहै निस जाम
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पंडित सेती कहि रह्या, भीतरि भेद्या नाहिं
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