केतकि, असोक, नव चंपक, बकुल कुल,कौंन धौं वियोगिनी कौं ऐसौ बिकराल है।सेनापति साँवरे की, सूरति की सुरति कीसुरति कराइ करि डारत बिहाल है॥दछिन-पवन एती ताहू की दवन जऊ,सूनौ है भवन परदेस प्यारौ लाल है।लाल हैं प्रबाल फूले देखत बिसाल, जऊफूले और साल पै रसाल उर-साल है॥

केतकि, असोक, नव चंपक, बकुल कुल
सेनापतिकवित्त · लगभग २ मिनट