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खेलतु फाग लख्यी पिय प्यारी

सवैया · लगभग २ मिनट
खेलतु फाग लख्यी पिय प्यारी को ता सुख की उपमा किहिं दीजै।देखत ही बनि आवै भलै रसखान कहा है जो वारि न कीजै॥ज्यौं ज्यौं छबीली कहै पिचकारी लै एक लई यह दूसरी लीजै।त्यौं त्यौं छबीलो छकै छवि छाक सो हेरै हँसे न टरै खरौ भीजै॥

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