अरी प्यारी कैं लाल लागे देन महाउर पाय।जब भरि सींकहिं चहत स्याम घन दीजै चित्र विचित्र बनाय॥रहत लुभाय चरन लखि इक टक बिबस होत रंग भरयो न जाय।नंददास खिजि कहत लाडली रहौ, रही तब पगनि दुराय॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+