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रास में रसिक दोऊ

पद · लगभग २ मिनट
रास में रसिक दोऊ आनंद भरि नाचत,गताद्रिम द्रिमता ततथेइ ततथेइ गति बोले।अंग-अंग बिचित्र किए लाल काछनी कटि सुदेस,कुंडल झलक कपोल सीस मुकुट डोले॥जुवति-जूथ नृत्य करत स्याम ग्रीव भुजा धरे,स्यामहि मीत रसना सम तोले।नंददास पिया प्यारी की छवि पर त्रिभुवन की,सोभा वारौं बिनु मोले॥

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