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कृष्ण जन्म

पद · लगभग २ मिनट
जसुमति सुत प्रगट्यौ सुनि, फूले ब्रजराज हो।बड़े भाग खुले, करन आये सुर-काज हो॥गाय ब्रज सिंगारी सब, बसन भूषन साज हो।देखन कों आय जुरे, गोप-गोपि समाज हो॥सिगरे मिलि नाचें-गावें, छाँड़ि लोक-लाज हो।दूध-दही-माखन लै, छिरकें करि गाज हो॥नंद सबन दीने बहु, धेनु-बसन-नाज हो।प्रगट भये ‘रसिक प्रीतम’, गोकुल-सिरताज हो॥

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