झूलौ पालने नंद नंदागोस्वामी हरिरायकविताझूलौ पालने नंद नंदा
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३२ रचनाएँ

झूलौ पालने नंद नंदागोस्वामी हरिरायकविता
नंदराय के भवन बधाईगोस्वामी हरिरायकविता
दोऊ भया घुटुरुवन चलतगोस्वामी हरिरायकविता
आवैगी मेरी बलायगोस्वामी हरिरायकविता
दूलह दुलहिन अधिक बनीगोस्वामी हरिरायकविता
यह विधि सचु सों रैनु बिहानीगोस्वामी हरिरायकविता
मधुकर! करहु और कछु बातगोस्वामी हरिरायकविता
मधुकर! करिवे में कहा राखीगोस्वामी हरिरायकविता
मधुप! मधुपुरी खरी हरि भाईगोस्वामी हरिरायकविता
कृष्ण जन्मगोस्वामी हरिरायकविता
गोद बैठाय जिमावत मैयागोस्वामी हरिरायकविता
ऊधौ! छाँड़ियै हरि बातगोस्वामी हरिरायकविता
फूली-फूली हो नंदरानीगोस्वामी हरिरायकविता
पिय तेरी चितबन ही में टौनागोस्वामी हरिरायकविता
हरि मुख देख बाबा नंदगोस्वामी हरिरायकविता
स्याम सों लगी लगन मन कीगोस्वामी हरिरायकविता
बुलावति जसुदा तोतरे बोलगोस्वामी हरिरायकविता
पिय तोहि नैनन ही में राखूँगोस्वामी हरिरायकविता
गाय चरावन चले प्रभातगोस्वामी हरिरायकविता
नैन तेरे री अति चपलगोस्वामी हरिरायकविता
बिरहिनि कौन नींद निसि सोवैगोस्वामी हरिरायकविता
यह कौन टेब तेरी कन्हैयागोस्वामी हरिरायकविता
लाल हौ तुम सों बहौत लरीगोस्वामी हरिरायकविता
लाल! तुम कैसे चराईं गाइगोस्वामी हरिरायकविता
तेरे अंग स्याम सारी सोहैगोस्वामी हरिरायकविता
भैया हो! अबहु छाक नहीं आईगोस्वामी हरिरायकविता
ऊधौ! सूधौ वचन कहौगोस्वामी हरिरायकविता
पिय सों बातन बीती रातगोस्वामी हरिरायकविता
बंसी मेरी प्यारीगोस्वामी हरिरायकविता
नात होती लराई दृगन मेंगोस्वामी हरिरायकविता
रसिक रस माती होगोस्वामी हरिरायकविता
मोहि कहत हौ चोरगोस्वामी हरिरायकविता