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पिय तोहि नैनन ही में राखूँ

पद · लगभग २ मिनट
पिय तोहि नैनन ही में राखूँ।तेरी एक रोम की छबि पर, जगत वारि सब नाखूँ॥भेटों सकल अंग सावल कों, अधर सुधा-रस चाखूँ।‘रसिक प्रीतम’ संगम की बातें, काहू सों नहिं भाखूँ॥

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