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मोहि कहत हौ चोर

चौकड़िया · लगभग २ मिनट
मोहि कहत हौ चोर, कहो किन कीनी चोरी।बिन दीने मैं कहा लियौ है, ऐसी न जानत हो री॥आप सिखाय बताय सबै बिधि, अब तुम दैन उराहन दौरी।साँची बात ‘रसिक प्रीतम’ की, लरिकाई जानी जसुमत भोरी॥

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