मोहि कहत हौ चोर, कहो किन कीनी चोरी।बिन दीने मैं कहा लियौ है, ऐसी न जानत हो री॥आप सिखाय बताय सबै बिधि, अब तुम दैन उराहन दौरी।साँची बात ‘रसिक प्रीतम’ की, लरिकाई जानी जसुमत भोरी॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+