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पिय सों बातन बीती रात

पद · लगभग २ मिनट
पिय सों बातन बीती रात।वदन बिलोकत सखी स्याम कौ, भूलि गई सुधि गात॥खेलत-हँसत समी नहीं जानौ, पिय दरसन की भाँति।छिन-छिन औरहि औरे उपजत, सुंदर मुख की कांति॥तब तें मोहि न भावै री कछु, कही-सुनी न सुहात।‘रसिक प्रीतम’ के सुख की सुधि मोहि, क्यों हू नाँ बिसरात॥

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