मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

नंदराय के भवन बधाई

पद · लगभग २ मिनट
नंदराय के भवन बधाई॥चलौ सखी मिलि मंगल गावो।मन आनंद सिंगार करावो॥आँगन माँझ भई सब ठाडी।जहाँ प्रभा अति भारी बाढ़ी॥भरत परस्पर नारी अंकों।खेलत हैं वे निपट निसंकों॥चहुँ दिसि तें वे बाजे बाजें।एक ओर जुबती सब गाजें॥जो कोऊ ऐसौ औसर पावत।दूध माट सीस तें नावत॥आँगन दधि-घृत-पय के सागर।प्रगट भयौ सुत ब्रज उजियागर॥असि भई राय सदन में सोभा।देखत ही सबकौ मन लोभा॥दान-मान गोकुल कौ राख्यौ।दियौ सबन कों मुख कौ भाख्यौ॥और अधिक कछु कहत न आवै।निरखत ‘रसिक प्रीतम’ सुख पावै॥

अब कुछ और पढ़ें