जौलौं हौं कान्ह रहौं गुन गोए।तौलौं तुमहि पत्यात लोग सब, सुसुकि सभीत साँचु सो रोए ।। 1 ।।हौ भले नँग-फँग परे गढ़ीबे, अब ए गढ़त महरि मुख जोएँ।चुपकि न रहत, कहै कछु चाहत, ह्वैहै कीच कोठिला धोएँ ।। 2 ।।गरजति कहा तरजिनिन्ह तरजति, बरजत सैन नैन के कोए।तुलसी मुदित मातु सुत गति लखि, विथकी है ग्वाति मैन मन मोए ।। 3।।

जौलौं हौं कान्ह रहौं गुन गोए
तुलसीदासपद · लगभग २ मिनट