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एक ब्रह्ममय सब जगत, ऐसे कहत जु बेद

दोहा · लगभग २ मिनट
एक ब्रह्ममय सब जगत, ऐसे कहत जु बेद।कौन देत को लेत सखि, रति सुख समुझि अभेद॥

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