अरुन नयन खंडित अधर, खुले केस अलसातिकृपारामकविताअरुन नयन खंडित अधर, खुले केस अलसाति
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१० रचनाएँ

अरुन नयन खंडित अधर, खुले केस अलसातिकृपारामकविता
ऐसी आजु कहा भई, मो गति पलटे हालकृपारामकविता
सुरत करत पाइल बजै, लजै लजीली भूरिकृपारामकविता
एक ब्रह्ममय सब जगत, ऐसे कहत जु बेदकृपारामकविता
कछु जोबन आभास तें, बढ़ी बधू दुति अंगकृपारामकविता
वेद पुरान विरंचि सिव, महिमा कहत बिचारिकृपारामकविता
बिरह सतावै रैन दिन, तऊ रटै तव नामकृपारामकविता
खिझवति हँसति लजाति पुनि, चितवति चमकति हालकृपारामकविता
भरि लोचन बोली प्रिया, कुंज ओट रिसठानिकृपारामकविता
बीति रैनि आए कहा, भोर भएँ धन देहुकृपारामकविता