झूठौ जग एन सुन नित्य गुरु बैन देखे,आपने हू नैंन तोऊ अंध रहै ज्वानी मैं।केते राव राजा रंक भये रहे चलि गये,मिलि गये धूर मांही आये ते कहानी मैं।सुंदर कहत अब ताहि न सुरत आवै,चेतै क्यौं न मूढ़ चित्त लाय हिरदानी मैं।भूले जन दाव जात लोह कौ सौ ताव जात,आव जात ऐसे जैसें नाव जात पानी मैं॥

झूठौ जग एन सुन नित्य गुरु बैन देषे
सुंदरदासकवित्त · लगभग २ मिनट