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तन भीतरि मन मानियाँ, बाहरि कहा न जाइ

साखी · लगभग २ मिनट
तन भीतरि मन मानियाँ, बाहरि कहा न जाइ।ज्वाला तैं फिर जल भया, बुझी बलंती लाइ॥३१॥

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