कितने दिन जीवन-जलनिधि में-विकल अनिल से प्रेरित होकरलहरी, कूल चूमने चल करउठती-गिरती सी रुक रुक करसृजन करेगी छवि गति-विधि में!कितनी मधु-संगीत-निनादित -गाथाएँ निज ले चिर-संचिततरल तान गावेगी वंचित!पागल-सी इस पथ निरवधि में!दिनकर हिमकर तारा के दलइसके मुकुर वक्ष में निर्मलचित्र बनायेंगे निज चंचल!आशा की माधुरी अवधि में!

कितने दिन जीवन-जलनिधि में-
जयशंकर प्रसादकविता · लगभग २ मिनट